राजभासा दिवस बिसेस : ‘मोर चिन्हारी छत्तीसगढ़ी’ के संग राज्यपाल, छत्तीसगढ़ी म पढ़ई-लिखई बर सीएम, पीएम अउ रास्ट्रपति ले करहीं गोठ-बात

रायपुर। पढ़बो..लिखबो..गोठियाबो छत्तीसगढ़ी. ये नारा आज छत्तीसगढ़ म आंदोलन बन चुके हे. काबर कि छत्तीसगढ़ ल राज बने 19 बछर अउ छत्तीसगढ़ी राजभासा बने 12 बरिस होगे तभो ले छत्तीसगढ़ी म न तो पढ़ई-लिखई सुरू हो पाय हे अउ न सरकारी काम-काज के भासा छत्तीसगढ़ी बन पाय हे. जबकि छत्तीसगढ़ अलग राज अपन अलग चिन्हारी भासा अउ संस्कृति लेके ही बने रहिस. फेर अइनस काबर होवत के महतारी भाँखा अपने घर म ही मान नइ पावत हे. इही चिंता, चिंतन अउ चरचा के बीच राजधानी रायपुर म 28 नवंबर के एक बड़का कार्यक्रम होइस. ये कार्यक्रम म राज्यपाल जी माई पहुना बन के आइन. मंच ले उन कहिन मोर चिन्हारी छत्तीसगढ़ी के जेन अभियान मयँ वोमा तुँहर संग हव.

28 नवंबर छत्तीसगढ़ी राजभासा दिवस के दिन दू ठिन सत्र म खूब चरचा होइस. मोर चिन्ह्रारी छत्तीसगढ़ी के कार्यक्रम म छत्तीसगढ़ी राजभासा मंच के संयोजक नंदकिसोर सुकुल कहिन के छत्तीसगढ़ी म पढ़ाय-लिखाय बर कोनो अरचन नइहे. आठवीं अनुसूची के घलोक जरूरत नइहे. सरकार चाहय त मिनट म फइसला हो सकत हे. काबर कि हमर कना छत्तीसगढ़ी म लिखे-पढ़े के साहित्य भरे हुए हे, हमर बियाकरन 1885 ले हे. 2007 ले छत्तीसगढ़ी ह राजभासा बन गे. हमर चिन्हारी ही छत्तीसगढ़ी हरय. अइसन सरकार फइसला ले म अब अउ देरी नइ करना चाही.

जिला सिक्छाधिकारी जी.आर. चंद्राकर कहिन कि हम सबके जिम्मेदारी बनथे कि छत्तीसगढ़ी ल जगह-जगह बगरावन. मयँ अब खुद स्कूल मन म छत्तीसगढ़ ल जियादा ले जियादा पहुँचाय के काम करहूँ. जबकि छत्तीसगढ़ी राजभासा आयोग के सचिव जे. आर. भगत कहिन कि हम अधिकारी-करमचारी मन ल छत्तीसगढ़ी के परसिक्छन घलोक देत हन. उमन ल छत्तीसगढ़ी म लिखा-पढ़ी करे बर कहत. मोर चिन्हारी छत्तीसगढ़ी समिति कोति ले सुझाव मिले हे उहू म अमल करबो.

चरचा म हिस्सा लेने वाला मुख्यमंतरी के सलाहकार प्रदीप शर्मा के कहिना हे के महतारी भासा के विकल्प कोनो भासा नइ हो सकय. आप मन के जेन मांग हे वोला मुख्यमंतरी कना रखहूँ. उहें फिलिम अभिनेता पदमसिरी अनुज शर्मा कहिन मयँ आज जो कुछ भी छत्तीसगढ़ी भासा के बदऊलत हव.

कार्यक्रम छत्तीसगढ़ी के संग-संग हल्बी, गोंडी, सरगुजिया, कुड़ुक ऊपर घलोक गोठ-बात होइस. चरचा म हिस्सा ले बर उत्तर बस्तर कांकेर ले आय बिस्नुदेव अउ पीला राम मरकाम रायपुर पहुँचिन. बिस्नुदेव बताइन के उन गोंडी म लइका मन ल पढ़ात हे. उंखर स्कूल के संचालन आदिवासी समाज करथे. उन मांग करिन महतारी भासा म ही सिक्छा मिलना चाही.

मोर चिन्हारी के ये कार्यक्रम दू झिन बड़का साहित्यकार म घलोक सामिल होइन. नाव हे परदेसी राम बरमा अउ बिहारी लाल साहू. बिहारी साहू कहिन के बस्तर ले लेके सरगुजा तक छत्तीसगढ़ी म एकरूपता हे. कहू मेर भी कोनो भी महतारी भासा ल लेके भेद नइहे. परदेसी राम बरमा कहिन के छत्तीसगढ़ी साहित्य के इहां भंडार हे. साहित्यकार म अपार हे. उंखर सेवा ले अउ महतारी भासा म पढ़ई-लिखई सुरू करय.

छत्तीसगढ़ी ल गूगल म पहुँचा के वोला बिस्व भर फइलाने वाला संजीव तिवारी के कहिना हे कि आज इंटरनेट म छत्तीसगढ़ी बड़ तेजी ले आघू बाढ़त हे. गूगल म 20 हजार के करीब छत्तीसगढ़ी के सब्द पहुँच गे हे. जबकि कवि अरुण निगम के कहिना हे कि बिना महतारी भासा के मनखे के बिकास होय नइ सकय. चरचा के इही बीच म छत्तीसगढ़िया महिला क्रांति सेना के अध्यक्छ अमित बघेल कहिन कि सरकार छत्तीसगढ़ी ल जल्दी ले जल्दी सिक्छा के माध्यम नइ बनाही त फेर बड़का आंदोलन करे जहि. अइसनेहे कुछू जोर छत्तीसगढ़िया महिला क्रांति सेना के अध्यक्ष लता राठौर घलोक दइन.

मोर चिन्हारी छत्तीसगढ़ी के कार्यक्रम म माई पहुना बनके आइन राज्यपाल अनुसुईया उइके घलोक बड़ खुस होइन. उन कहिन कि महतारी भासा म पढ़ई-लिखई होना चाही. येखर बर जेन भी परयास हो सकत हे मयँ हर स्तर म करहूँ. मुख्यमंतरी ले घलोक चरचा करहूँ. आठवीं अनुसूची बर तो केंन्द्र सरकार रास्ट्रपति कना घलोक बात ल रखहूँ.

मोर चिन्हारी छत्तीसगढ़ी के ये कार्यक्रम म 40 बछर तक छत्तीसगढ़ी सेवक पतरिका निकालने वाला जागेस्वर परसाद जी ल सम्मानित करे गिस. संगे-संग ईश्वर साहू कोति ले निकाले जाने वाला छत्तीसगढ़ी कैलेंडर ‘बछर’ के बिमोचन घलोक करे गिस. कार्यक्रम के अंत म आरु साहू अउ लक्ष्मी कलिहारे छत्तीसगढ़ी गीत घलोक गाइन.

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